व्हाइट टाईगर सफारी एवं ज़ू मुकुंदपुर

व्हाइट टाईगर सफारी एवं ज़ू मुकुंदपुर वन वृत्त रीवा20160305_160724

विन्ध्य की धरा सफेद शेरों की जननी है। इसी विन्ध्य क्षेत्र ने पूरी दुनियां को सफेद शेर दिए हैं। सीधी के जंगलों के बीच डेवा एक गांव है जहां रीवा महाराज ने अपने अतिथि महाराजा अजित सिंह के सम्मान में आखेट का केम्प लगाया था। इसी के पास पनखोरा के जंगल में एक नाले के किनारे एक गुफा है जहां से 27 मई 1951 में इसी विन्ध्य क्षेत्र में महाराज रीवा श्री मार्तण्ड सिंह जू देव जी के द्वारा एक सफेद बाघ शावक को पकड़कर अपने गोविन्दगढ़ किले में बन्दी रखा था। जंगलों से जिन्दा पकड़े जाने वाला सम्भवतया यह आखिरी सफेद बाघ था। यह सफेद बाघ शावक सबका मन मोह रहा था तो इसका नाम मोहन रखा गया। इसी मोहन से प्रथम बार बंदी अवस्था बाघों का प्रजनन प्रारम्भ हुआ और फिर गोविन्दगढ़ विश्व में सफेद शेरों का प्रथम बन्दी प्रजनन केन्द्र के रूप में विख्यात हुआ। आज विश्व में जीवित समस्त सफेद शेर ’’मोहन तथा राधा’’ की ही संतति हैं। लगभग 19 वर्षों तक गोविन्दगढ़ के राजमहल में शानोशौकत के साथ सफेद बाघों का परिवार बढ़ाने वाले और मानवता को प्रकृति की अनुपम भेंट देने वाले मोहन की 18 दिसम्बर 1969 को मृत्यु हो गई। जुलाई 1976 में गोविन्दगढ़ में अन्तिम सफेद बाघ विराट की मृत्यु के साथ ही विन्ध्य में सफेद बाघ इतिहास में खो गए। विश्व को सफेद शेरों की सौगात देने वाले इस विन्ध्य क्षेत्र में चिडि़याघर सह वन्यप्राणी उपचार केन्द्र एवं व्हाइट टाईगर सफारी की स्थापना का एतिहासिक अधिकार है|अतःव्हाइट टाईगर सफारी एवं ज़ू की स्थापना रीवा वन वृत्त क्षेत्र मुकुंदपुर में की गई है|जो कि पर्यटन का केन्द्र है एवं विन्ध्य क्षेत्र की शान है|