वेंकट भवन

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कोठी कम्पाउण्ड परिसर में स्थित यह भवन बघेल नरेशों द्वारा निर्मित कराये गये महलों में एक श्रेष्ठ महल है। महाराज वेंकटरमण सिंह ने सन् 1908 में इस शाही महल का निर्माण कराया था जिसे वेंकट भवन के नाम से जाना जाता है। रीवा के मध्य में यह एक भव्य भवन हैंइा भवन में शीशें की बेहतरीन नक्काशी की गई है। यह महल एक हौज पर खड़ा है। ऊपर के मंजिल में एक विशाल गोलाकार शाही हाल है। महल की दीवारों में संगमरमर की भस्मी से अस्तर किया गया है। चमक इतनी है कि लोग अपना चेहरा देख सकतें हैं। इस हाल के चारों ओर चार कक्ष है। काँच की बेहतरीन नक्काशी का कार्य जोधपुर जयपुर एवं आगरा के कारीगरों द्वारा किया गया था। यह महल आगरे के ताजमहल की याद दिला देता है। उक्त हाल में खूबसूरत मीनाकारी का कार्य भी किया गया है इस महल में चारों तरफ की छतुरियाँ इसकी सुन्दरता पर चार चाँद लगा होगा।
सन् 1640 ई में पहाड़ सिंह बुन्देला द्वारा और सन् 1726 ई में पन्ना के राजा हृदय शाह बुन्देला द्वारा रीवा राज्य पर हमला किया गया था। इन दोनों हमलों के दौरान राज परिवार की सुरक्षा के लिये कोई गोपनीय व्यवस्था नही थी। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए महाराज व्यंकटरमण सिंह ने रनिवास और अमरा कोठी को जोड़ते हुए वेंकट भवन में लम्बी सुरंगों का निर्माण करवाया था। सुरंग की एक दिशा बावड़ी की ओर जाती है इसके मध्य मे एक गोलाकार स्नानागार रहा होगा।स्नानागार का पानी बाहर निकालने की व्यवस्था भी थी। ऐतिहासिक सुरंग की चौड़ाई 12 फिट है तथा अंदर से सुरंग की ऊँचाई भी 12 फिट है। सुरंग में उतरते ही सीढी से गोलम्बर की तरफ की लम्बाई 146 फिट 2 ईच है। फिर बायें घूमने पर 150 फिट तक सुरंग जाती है लेकिन अमरा कोठी के पूर्व की इस सुरंग को लगभग तीन दशक पूर्व अस्थाई तौर पर रोक दिया गया था।