महामृत्युंजय मन्दिर किला रीवा

महामृत्युंजय मन्दिर किला रीवाmahamritunjaya-temple
रीवा के प्राचीन किले के अन्दर अनेक मन्दिर हैं जिनमें महामृत्युंजय मन्दिर राजाधिराज के पंच मन्दिर गणेश मन्दिर जगन्नाथ मन्दिर जी का मन्दिर प्रमुख हैं। भगवान महामृत्युजय का मन्दिर रीवा का प्रमुख देव स्थान है। इस मन्दिर का निर्माण तत्कालीन रीवा नरेश महाराज भाव सिंह ने सन् 1675-1694 के बीच कराया था। महामृत्यंजय मन्दिर भारत के इने-गिने मन्दिरों में सें एक है। इस मन्दिर के अन्दर ही माँ पार्वती की मूर्ति भी है। कहा जाता है कि महामृत्युंजय में जो शिवलिंग है, उसे लवानों के द्वारा भेडाघाट से यहाँ लाया गया था। लवाना जाति के लोग व्यापार हेतु एक जगह से दूसरे जगह जाया करते थे। इनका पड़ाव नदी के किनारे सुरक्षित स्थानों में हुआ करता था। बीहर-बिछिया नदी का संगम स्थल भी इनका पडाव था। एक बार लवाने भेड़ाघाट (जबलपुर से शिवलिंग बैल पर लादकर यहाँ आये और संगम स्थल पर पड़ाव किया। यहाँ से जब लवाने जाने लगे तब शिवलिंग को काफी प्रयास करने के बावजूद उठा नहीं पाये। महाराज विक्रमादित्य ने जब अपनी राजधानी रीवा में स्थापित की तब उन्होनें इस शिवलिंग की स्थापना किले के प्रांगण में करायी। आगे चलकर महाराज भाव सिंह ने इसे एक भव्य मंन्दिर का स्वरूप प्रदान किया ।